आजाद गजल -क्या मिला!

Prahalad Shrimali Jul 10, 2025 गजल 2

प्रह्लाद श्रीमाली की यह रचना हास्य और कटाक्ष के माध्यम से सामाजिक व्यवहारों, ढकोसलों और राजनीतिक विडंबनाओं पर करारा व्यंग्य करती है। 'क्या मिला?' के सवाल के साथ यह रचना हमें अपने ही कर्मों, परंपराओं और सोच पर पुनर्विचार करने को मजबूर करती है।

उठ ,चल ,फिर दौड़-Poems-Hindi

Vidya Dubey Jul 10, 2025 हिंदी कविता 2

यह कविता जीवन के संघर्ष, आत्मविश्वास और लक्ष्य साधना की प्रेरणा देती है। गिरने, थमने और लड़खड़ाने के बीच भी उठकर आगे बढ़ते रहने की बात करती है। यह पसीने को मेहनत का मोती मानती है और हार को मंजिल की सीढ़ी।

गुरु गुड ही रहे चेला चीनी हो गए-हास्य-व्यंग्य

डॉ मुकेश 'असीमित' Jul 10, 2025 व्यंग रचनाएं 2

गुरु अब ज्ञान के प्रतीक नहीं, शॉर्टकट और टिप्स देने वाले बाज़ारू ब्रांड बन चुके हैं। चेला बनना खतरे से खाली नहीं, क्योंकि हर चेला गुरु बनने की फिराक में है। गुरु-शिष्य परंपरा अब कोर्ट-कचहरी, दलाली, और सट्टे की दुनिया में ‘गुरु मंत्र’ से ज़्यादा ‘टिप्स मंत्र’ में बदल चुकी है।

गिरने में क्या हर्ज़ है-पुस्तक समीक्षा व्यंग्यकार अर्चना चतुर्वेदी द्वारा

डॉ मुकेश 'असीमित' Jul 9, 2025 Book Review 1

‘गिरने में क्या हर्ज है’ डाक्टर मुकेश ‘असीमित’ जी का पहला व्यंग्य संग्रह है । पहले संग्रह के हिसाब से देखा जाए तो डॉक्टर साब व्यंग्य में नए हैं पर इनकी रचनाएं काफी परिपक्व हैं । भाषा की बात हो या शिल्प की या विषय की डॉक्टर साब मंझे हुए व्यंग्यकार ही महसूस होंगें । […]

सैनिकों को सलाम-Poem-Hindi

Babita Kumawat Jul 9, 2025 Poems 8

"ये कविता मातृभूमि की रक्षा में तैनात भारत माँ के लाड़ले सैनिकों को समर्पित है। जो अपने प्राणों की आहुति देकर तिरंगे की शान को ऊँचा रखते हैं। इनका स्वाभिमान, जज़्बा और शहादत भारत के गौरव के प्रतीक हैं। राष्ट्र सदा इनकी ऋणी रहेगा।"

देव सो रहे हैं और आम आदमी पिट रहा है….? व्यंग्य

Sunil Jain Rahee Jul 8, 2025 व्यंग रचनाएं 5

जब देव सोते हैं तो देश की नींव भी ऊंघने लगती है। जनता, बाबू, साहब और चपरासी सब अपनी-अपनी तरह से नींद का महिमामंडन करते हैं। जागने की ज़िम्मेदारी बस सेना और कुछ अदृश्य प्रहरी निभाते हैं। इस नींद में सत्ता फलती है, और जनहित सो जाता है।

अब ए.आई. भी ‘आई’ बन सकती है!-हास्य व्यंग्य

डॉ मुकेश 'असीमित' Jul 8, 2025 व्यंग रचनाएं 4

ए.आई. अब सिर्फ इंटेलिजेंस नहीं, अब वह 'आई' भी है! तकनीक की इस नई छलांग में अब प्रेम, गर्भ और पालन-पोषण भी कोडिंग से संभव है। रोबोट अब लैब में पालना झुला रहे हैं और इंसान हैरत से देख रहे हैं — यह भविष्य है या व्यंग्य! इस लेख में तकनीक और परवरिश का अद्भुत संगम दिखाई देता है — मानो ‘माँ’ अब मशीन बन गई हो।

काव्य संग्रह समीक्षा-तुम मेरे अज़ीज़ हो-डॉ मुकेश असीमित द्वारा

डॉ मुकेश 'असीमित' Jul 8, 2025 Book Review 4

"तुम मेरे अज़ीज़ हो" सिर्फ प्रेम का नहीं, आत्म-संवाद, स्मृति और मौन की यात्रा है। पंकज त्रिवेदी की सरल भाषा में छिपे गहन भाव, प्रेम को एक दार्शनिक और अनुभूतिपरक अनुभव में बदल देते हैं। यह संग्रह पढ़ने नहीं, भीतर महसूस करने के लिए है।

वाह भाई वाह -कविता -हास्य व्यंग्य

डॉ मुकेश 'असीमित' Jul 7, 2025 हिंदी कविता 0

सामाजिक विडंबनाओं पर करारा व्यंग्य करती ये कविता ‘वाह भाई वाह’ हमें उन विसंगतियों का एहसास कराती है जहाँ ज़िंदगी त्रासदी बन चुकी है, फिर भी आमजन तमाशबीन बना बैठा है। गड्ढों, महंगाई, रिश्तों की दूरी और शिक्षा की मार के बीच भी मुस्कुराता देश – ‘वाह भाई वाह’!

एक पत्थर की कहानी -कविता रचना

Vidya Dubey Jul 7, 2025 हिंदी कविता 1

विद्या पोखरियाल की यह कविता "पत्थर हूं मैं" जीवन की विसंगतियों को एक प्रतीक के रूप में प्रस्तुत करती है। यह पत्थर कभी पूजित है, कभी ठुकराया गया। मंदिर, नदी, पहाड़ और रास्ते — हर स्थल पर उसका एक अलग अस्तित्व है। यह साधारण होते हुए भी असाधारण है।