Vivek Ranjan Shreevastav
Jul 5, 2025
व्यंग रचनाएं
2
आज की डिजिटल दुनिया में अधजल गगरी का छलकना नए ट्रेंड का प्रतीक बन गया है। सोशल मीडिया पर ज्ञान कम और आत्मविश्वास ज़्यादा दिखाई देता है। व्हाट्सऐप यूनिवर्सिटी, ट्विटर वॉरियर्स और इंस्टाग्राम फिलॉसफर — सभी अधूरे ज्ञान से ज़ोरदार शोर करते हैं, जबकि असल ज्ञानी मौन रहते हैं।
Vidya Dubey
Jul 5, 2025
Poems
6
यह कविता स्त्री के संघर्ष, सहनशीलता और उसकी शक्तियों का गान है। माँ, बहन, पत्नी, प्रेमिका, देवी — हर भूमिका में वह समाज की नींव है। वह कमजोर नहीं, संसार की रचयिता है। उसकी जात सिर्फ 'औरत' नहीं, एक सम्पूर्ण सृष्टि है। यही उसका आत्मघोष है: हां मैं एक औरत हूं।
डॉ मुकेश 'असीमित'
Jul 4, 2025
व्यंग रचनाएं
2
हर मोहल्ले में एक ‘भविष्यवक्ता अंकल’ होते हैं—जो हर शुभ कार्य में अमंगल ढूँढने को व्याकुल रहते हैं। उनकी ज़ुबान पर एक ही ब्रह्मवाक्य रहता है—“लिख के ले लो!” ये आत्ममुग्ध, आशंकित और नकारात्मकता के सर्टिफाइड वितरक होते हैं, जो खुशखबरी को अपशकुन मानते हैं।
डॉ मुकेश 'असीमित'
Jul 3, 2025
Book Review
4
Dr. Mukesh Aseemit’s "Roses & Thorns" is a witty collection of satirical essays reflecting India’s socio-political contradictions. With humor and depth, it critiques modern absurdities—from politics to pop culture—offering both laughs and truths. A bouquet of insight and irony for readers who enjoy thinking while they smile.
डॉ मुकेश 'असीमित'
Jul 3, 2025
व्यंग रचनाएं
1
श्रीकृष्ण अर्जुन को कलियुग की विभीषिका 'रिश्वत' के स्वरूप से अवगत करा रहे हैं। पार्श्व में छिपा राक्षसी रूप और धनराशि की पोटलियाँ इस भ्रष्टाचार के मायावी विस्तार का प्रतीक हैं। यह संवाद धर्म, विवेक और युगबोध का अद्भुत मिश्रण है।
Vidya Dubey
Jul 3, 2025
Poems
2
विद्या पोखरियाल की यह कविता एक माँ की गहन भावनाओं की अभिव्यक्ति है, जो अपने बच्चे के नाम से अपना अस्तित्व गढ़ना चाहती है। वह उसका पथप्रदर्शक बनना चाहती है, उसका संसार संवारना चाहती है और हर कठिनाई में साथ निभाने को तत्पर है — पूर्ण समर्पण की अद्वितीय अभिव्यक्ति।
Uttam Kumar
Jul 3, 2025
Poems
2
इस कविता में सावन का रसभीना चित्र है—जहाँ झूले हैं, कजरी है, और बदरा की फुहारें हैं, वहीं किसी के पिया की दूरी आँखों में तड़प बनकर उतरती है। यह रचना सावन की सौंदर्याभिव्यक्ति और विरह के भाव का सुंदर संगम है।
Dr Shailesh Shukla
Jul 3, 2025
हिंदी लेख
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यह आलेख हिंदी भाषा की ऐतिहासिक जड़ों, संवैधानिक स्थिति, डिजिटल युग में इसकी भूमिका और वैश्विक पहचान की गहराई से पड़ताल करता है। हिंदी के सामाजिक, तकनीकी और प्रशासनिक विकास को रेखांकित करते हुए, इसे एक प्रभावी राजभाषा और सांस्कृतिक संवाहक के रूप में प्रस्तुत किया गया है।
Dr Rajshekhar Yadav
Jul 2, 2025
Blogs
0
प्राइवेट अस्पतालों पर लूट के आरोप लगाने से पहले समाज को याद रखना चाहिए कि हमने ही इन्हें 'उपभोक्ता वस्तु' बना दिया। जिस प्रोफेशन पर सबसे ज़्यादा कानून लागू हों, जहां हर चूक पर जुर्माना लगे, और फिर भी हम मुफ्त सेवा की अपेक्षा करें — क्या ये किसी एनकाउंटर से कम है?
डॉ मुकेश 'असीमित'
Jul 2, 2025
Blogs
0
Focus-Set goal; and set priorities around that goal. जीवन में Focus करने के लिए, हमें अपनी long term vision पर बहुत स्पष्ट होना चाहिए। यदि हम ध्यान केंद्रित करना चाहते हैं, तो हमें यह जानना आवश्यक है कि हमारी ऊर्जा को कहां तक पहुंचाना है। और यही “Habits of highl;y effective people ” पुस्तक की […]