Vidya Dubey
Jul 15, 2025
हिंदी कविता
2
बारिश की हर बूंद, प्रतीक्षा की तपिश से दहकती है। पेड़-पत्ते जवां हैं, बगिया महकी है, लेकिन प्रेमी नहीं आया। बूंदें अब फूल नहीं, अंगारे बन गई हैं। विद्या पोखरियाल की स्वरचित कविता प्रेम, विरह और मानसून की इस जटिल रागिनी को भावभीने ढंग से उजागर करती है।
डॉ मुकेश 'असीमित'
Jul 15, 2025
व्यंग रचनाएं
6
बाढ़ आई नहीं कि सरकारी महकमें ‘आपदा प्रबंधन’ में ऐसे सक्रिय हो गए जैसे ‘मनौती’ पूरी हो गई हो। नदी उफनी नहीं कि पोस्टर लग गए, हेलिकॉप्टर उड़ गए, और राहत की थैलियाँ गिरने लगीं। मगरमच्छ तक घरों में घुस आए और मंत्रीजी बोले—“हर घर नल-जल योजना अब पूरी हो चुकी है।” प्रेस कांफ्रेंस में ठंडा पिलाकर सवाल बंद करवाना ही शायद सरकार का असली राहत प्रबंधन है।
डॉ मुकेश 'असीमित'
Jul 15, 2025
Book Review
3
डॉ. मुकेश असीमित का व्यंग्य संग्रह ‘गिरने में क्या हर्ज़ है’ न केवल भाषा की रवानगी दिखाता है, बल्कि विसंगतियों की गहरी पड़ताल भी करता है। समकालीन व्यंग्य की धारा में यह संग्रह एक उम्मीद की रेखा खींचता है।
Pradeep Audichya
Jul 14, 2025
व्यंग रचनाएं
4
सेठजी को अब ‘सेठ’ होने से संतोष नहीं, उन्हें ‘समाजसेवी’ भी बनना है—वो भी बिना समाज की सेवा किए! अखबार, होर्डिंग, माला और माइक की व्यवस्था है, गाय तक बुलवाई गई है फोटो के लिए। जीवन पर प्रकाश डालते मास्टर साहब बिजली चोरी, मंदिर पर कब्ज़ा और गरीबों की "सुरक्षा" के किस्से खोल देते हैं। मुनीम तुरंत टोका — “अब ज्यादा प्रकाश ठीक नहीं है।”
डॉ मुकेश 'असीमित'
Jul 14, 2025
हिंदी कविता
2
क्या आज़ादी सिर्फ कैलेंडर की छुट्टी बनकर रह गई है?
डॉ. मुकेश असीमित द्वारा स्वरचित और स्वरांजलि में प्रस्तुत यह समकालीन कविता "स्वतंत्रता के शेष प्रश्न" — आज़ादी के अर्थ पर एक गूढ़, विचारोत्तेजक और आत्ममंथन कराती रचना है। जब पूरा देश तिरंगे के नीचे झूम रहा है, कुछ सवाल अब भी हवा में तैर रहे हैं...
यह वीडियो स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर, भारत की आज़ादी की वर्तमान व्याख्या को लेकर एक भावपूर्ण प्रस्तुति है।
पूरी कविता ज़रूर सुनिए — शायद इन सवालों में कहीं आपका भी एक सवाल छुपा हो।
डॉ मुकेश 'असीमित'
Jul 14, 2025
Cinema Review
2
कालीधर लापता में कुंभ मेला बनारस के घाटों तक सिमट गया, अल्ज़ाइमर से पीड़ित किरदार अंग्रेज़ी बोलने लगा, और एक मासूम बच्चा शराब का इंतज़ाम करता दिखा! इन विसंगतियों ने कहानी की संवेदनशीलता को झकझोर दिया। फिल्म भावनात्मक हो सकती थी, पर बेमेल दृश्यों और स्क्रिप्ट की भूलों ने इसके असर को कमज़ोर कर दिया।
डॉ मुकेश 'असीमित'
Jul 14, 2025
संस्मरण
2
हॉस्टल की 'थ्रिल भरी' दुनिया से निकली एक रोमांचक रेल यात्रा की कहानी, जहाँ एक मेडिकल छात्र पुरानी आदतों के नशे में बिना टिकट कोटा पहुँचने की जुगत भिड़ाता है। कभी पचास के खुले न मिलने की मजबूरी, कभी टीटी से आँख-मिचौली, तो कभी जनरल डिब्बे में ‘इंच भर की सीट’ पर संतुलन साधना — हर दृश्य हास्य से लबरेज़ है। डर की कई 'किश्तों' के बीच चलती ट्रेन में 'किक' का अहसास, और आखिर में स्टेशन पर छलांग मारकर जीत का रोमांच। एक बेधड़क, बेपरवाह, लेकिन दिलचस्प रेल यात्रा — सिर्फ़ व्यंग्य की भाषा में!
डॉ मुकेश 'असीमित'
Jul 14, 2025
News and Events
0
Lions Club Sarthak successfully concluded its three-month-long free RO water service at Church Ground, Gangapur City. Initiated on May 15, the project benefited morning walkers, children, job aspirants, and rural travelers. On the final day, club members distributed buttermilk to mark the occasion. Despite rainy weather, member participation remained strong, reflecting true community spirit. The project was coordinated by Dr. Mukesh Garg with support from dedicated volunteers.
Prahalad Shrimali
Jul 13, 2025
व्यंग रचनाएं
1
मुंगेरीलाल केवल एक चरित्र नहीं, हर आम आदमी की अंतरात्मा है जो कठिन यथार्थ के बीच भी सुनहरे सपने देखता है। वह न पाखंडी है, न अवसरवादी—बल्कि एक ऐसा मासूम है जो बिना किसी प्रचार के देश की खुशहाली का सपना पालता है। उसकी दुनिया रंगीन जरूर है, लेकिन अहिंसक, नेकनीयत और हानिरहित है। ऐसे मुंगेरीलाल देश पर बोझ नहीं, बल्कि भावना के सच्चे वाहक हैं।
डॉ मुकेश 'असीमित'
Jul 13, 2025
Book Review
0
“In today’s democracy, it’s not votes but bar graphs that count.”
From buffaloes and NGOs to spreadsheets and spiritual records, “Numbers Speak” unveils how statistics are polished and presented as truth. Part of Roses and Thorns, this satire pierces through media hype and political spin with wit and bite—translated from Hindi with soul intact.