The World of the Selfie

डॉ मुकेश 'असीमित' Feb 7, 2026 Humour 0

Service without a selfie is like a donation without a receipt—you may have done it, but it can’t be proven.” “Real faces are now for private use; public life runs on filters.” “Travel no longer ends at the destination; it ends at the story highlight.” “Everyone is a hero, every frame is the Mahabharata, and every filter slaughters the truth.” “People don’t smile at people anymore—they smile only while taking selfies.”

Binni And Family -“बिन्नी, उसके दादाजी और हमारे अपने घरों की कहानी”

डॉ मुकेश 'असीमित' Feb 7, 2026 Cinema Review 0

“कल रात ‘Binny and Family’ देखी… आज सुबह से मन में वही दृश्य घूम रहे हैं—जैसे दादाजी की खामोशी में पूरा परिवार बोल रहा हो।” “यह फिल्म याद दिलाती है कि ‘पर्सनल स्पेस’ जरूरी है, लेकिन ‘किसी का होना’ उससे भी बड़ा सच है।” “जब बॉलीवुड ‘एक्सट्रीम’ बेच रहा हो, तब ‘सामान्य’ परिवार दिखा देना भी एक साहसिक सिनेमा-क्रिया है।”

ज़िंदगी: एक बोझिल कहानी या खुलता हुआ बैग?

डॉ मुकेश 'असीमित' Feb 6, 2026 Darshan Shastra Philosophy 3

ज़िंदगी घटनाओं की नहीं, व्याख्याओं की शृंखला है। हर इंसान अपने कंधे पर एक बैग उठाए चढ़ रहा है—यह मानकर कि उसमें सोना है। पर ऊँचाई बढ़ते ही जब साँस फूलने लगती है, तब सवाल उठता है— क्या सच में बोझ की क़ीमत थी, या हम सिर्फ़ कहानी ढो रहे थे?

Madhyamvargiya Shaadiyaan — The Symphony of Middle-Class Matrimony

डॉ मुकेश 'असीमित' Feb 6, 2026 English-Write Ups 0

“Shobha bani rahe is not a wish, it’s a budget sheet written in emotions.” “Blessings in Indian weddings now come gift-wrapped as SUVs, ACs, and Smart TVs.” “In middle-class marriages, pain is poetry and expense is parampara.” “CEO on the profile, Chashni Expert Officer in reality — the shehnaai knows no due diligence.”

राजनीति की गीता: कुर्सीपुराण का अंश

डॉ मुकेश 'असीमित' Feb 5, 2026 व्यंग रचनाएं 0

यह गीता मोक्ष नहीं दिलाती, यह कुर्सी दिलाती है—और वही इसका सबसे बड़ा धर्म है।जहाँ कर्म दूसरों से कराया जाता है और फल स्वयं भोगा जाता है, वहीं से राजनीति का शास्त्र शुरू होता है।

रिश्तों की गाड़ी और दो करोड़ की एक्सेसरीज़

डॉ मुकेश 'असीमित' Feb 4, 2026 व्यंग रचनाएं 0

आज रिश्ते तय नहीं होते, डेमो दिए जाते हैं। बायोडाटा अब परिचय नहीं, प्रोडक्ट कैटलॉग है—जिसमें माइलेज, एसेट्स और फ्री एक्सेसरीज़ गिनाई जाती हैं। सवाल बस इतना है: क्या संस्कार भी EMI पर मिलते हैं?

चार्जर खोजता भविष्य और ज्ञान बाँटता अतीत

डॉ मुकेश 'असीमित' Feb 4, 2026 व्यंग रचनाएं 1

डायल-अप की खटखट से लेकर 5G की बेचैनी तक—यह व्यंग्यात्मक लेख पीढ़ियों की उस यात्रा को पकड़ता है जहाँ रिश्ते तारों से जुड़े थे, सपने EMI पर चले और अब अस्तित्व चार्जिंग पॉइंट ढूँढ रहा है। Gen X की स्मृतियाँ, Gen Y की व्यावहारिकता, Gen Z की रील-हक़ीक़त और Gen Alpha की स्क्रीन-सभ्यता—सब एक कमरे में, एक ही नेटवर्क पर।

गुमनाम हूं ,लेकिन ,नाम वाला, हो जाऊं तो रिश्ते निकाल लेना!

Prem Chand Dwitiya Feb 4, 2026 व्यंग रचनाएं 1

पद्म पुरस्कारों की सूची ने एक बार फिर साबित किया कि नाम पहले नहीं, काम पहले आता है। जो लोग जिंदगी भर गुमनाम रहकर समाज की सफाई, शिक्षा, पर्यावरण और संवेदना की नींव मजबूत करते रहे—वही एक दिन नाम बन गए। असल में नाम कोई पदक नहीं, वह गुमनामी से निकलकर कर्मों की पहचान बन जाता है।

छोटे बनाम बड़े बाबू डा राम कुमार जोशी

Ram Kumar Joshi Jan 30, 2026 व्यंग रचनाएं 2

असल में काम तो छोटा बाबू ही करता है, पर वाहवाही और माल ऊपर वालों के हिस्से। बाबूजी के जूते ही उनकी सबसे मजबूत ढाल थे—कोई पूछे तो जवाब मिल जाता, “कहीं काम से गए होंगे।” फाइल ढूंढना समुद्र से मोती निकालने जैसा बताया गया, ताकि मोती की क़ीमत भी वसूली जा सके। धीरे-धीरे कलेक्टर साहब भी समझ गए—इस शाही नौकरी में ज्यादा ईमानदारी से शुगर-बीपी ही मिलता है। इस तरह बाबूओं के जाल में जिले के सबसे बड़े बाबू सरकार भी सम्मिलित हो गए।

वेदों का ब्रह्मांडीय समय और समय की सापेक्षता

डॉ मुकेश 'असीमित' Jan 29, 2026 Darshan Shastra Philosophy 0

समय को हम एक सीधी रेखा समझते आए हैं—घड़ी की सुइयों, दिनों और वर्षों में बँटा हुआ। लेकिन श्रीमद्भागवत पुराण की राजा ककुद्मी की कथा इस धारणा को पूरी तरह उलट देती है। यहाँ समय एक नहीं, बल्कि बहुस्तरीय है—हर लोक, हर आयाम और हर चेतना-स्तर का अपना समय है। कुछ क्षणों की प्रतीक्षा पृथ्वी पर करोड़ों वर्षों में बदल सकती है। यह लेख राजा ककुद्मी की कथा के माध्यम से वैदिक काल-गणना, चतुर्युग की अवधारणा और आधुनिक विज्ञान में समय-विलंब (Time Dilation) के सिद्धांत के बीच अद्भुत साम्य को उजागर करता है। यह केवल पौराणिक आख्यान नहीं, बल्कि मनुष्य को उसकी ब्रह्मांडीय लघुता का बोध कराने वाला गहन दार्शनिक अनुभव है।