डॉ मुकेश 'असीमित'
Jan 29, 2026
Darshan Shastra Philosophy
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समय को हम एक सीधी रेखा समझते आए हैं—घड़ी की सुइयों, दिनों और वर्षों में बँटा हुआ। लेकिन श्रीमद्भागवत पुराण की राजा ककुद्मी की कथा इस धारणा को पूरी तरह उलट देती है। यहाँ समय एक नहीं, बल्कि बहुस्तरीय है—हर लोक, हर आयाम और हर चेतना-स्तर का अपना समय है। कुछ क्षणों की प्रतीक्षा पृथ्वी पर करोड़ों वर्षों में बदल सकती है।
यह लेख राजा ककुद्मी की कथा के माध्यम से वैदिक काल-गणना, चतुर्युग की अवधारणा और आधुनिक विज्ञान में समय-विलंब (Time Dilation) के सिद्धांत के बीच अद्भुत साम्य को उजागर करता है। यह केवल पौराणिक आख्यान नहीं, बल्कि मनुष्य को उसकी ब्रह्मांडीय लघुता का बोध कराने वाला गहन दार्शनिक अनुभव है।
डॉ मुकेश 'असीमित'
Jan 29, 2026
Art and Craft
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भारत का उपनिवेशीकरण केवल तलवार और सत्ता का परिणाम नहीं था। उससे पहले और उससे कहीं गहराई तक, यह काम विचारों, इतिहास-लेखन और शिक्षा-नीति के माध्यम से किया जा चुका था। हिंदुओं को दुनिया किस दृष्टि से देखेगी, जाति और ब्राह्मणों को कैसे समझा जाएगा—इन सबकी रूपरेखा युद्धभूमि में नहीं, बल्कि बंद कमरों में तैयार की गई।
यह लेख उसी बौद्धिक उपनिवेशवाद की पड़ताल करता है, जहाँ भारतीय समाज को पिछड़ा, जड़ और सुधार-योग्य सिद्ध करना एक औपनिवेशिक आवश्यकता बन गया। जाति व्यवस्था को स्थिर और ब्राह्मणों को स्थायी खलनायक के रूप में प्रस्तुत करने की प्रक्रिया आज भी हमारे सामाजिक विमर्शों में प्रतिध्वनित होती है। लेख का उद्देश्य आरोप नहीं, बल्कि उस दृष्टि को पहचानना है, जो हमें सदियों से दी जाती रही है।
डॉ मुकेश 'असीमित'
Jan 21, 2026
व्यंग रचनाएं
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बेटा पैदा करने की ज़िद में परिवार ने इतिहास नहीं, मानसिकता की केस-स्टडी लिख दी।
नौ बेटियाँ जैसे प्राकृतिक आपदा और बेटा जैसे एनडीआरएफ की टीम।
‘काफ़ी’ और ‘माफ़ी’ बेटियों के नाम नहीं, समाज के लिए छोड़े गए मूक नोट्स हैं।
समाज आज भी प्रसव-कक्ष के बाहर खड़ा पूछ रहा है—“लड़का हुआ या फिर…?”
डॉ मुकेश 'असीमित'
Jan 21, 2026
व्यंग रचनाएं
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यह टंकी सिर्फ़ कंक्रीट का ढाँचा नहीं थी, यह व्यवस्था का आईना थी। उद्घाटन से पहले गिरकर इसने बता दिया कि जब नीयत खोखली हो, तो सबसे मज़बूत ढांचा भी बैठ जाता है।
डॉ मुकेश 'असीमित'
Jan 20, 2026
संस्मरण
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“मैं तेज़ नहीं हूँ, न आधुनिक—पर मैंने चलना सिखाया है।
मेरे चक्रों पर समय नहीं, स्मृतियाँ घूमती हैं।”
डॉ मुकेश 'असीमित'
Jan 19, 2026
Darshan Shastra Philosophy
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आत्मबोध मनुष्य की सबसे गहन यात्रा है — अहं से अनंत तक की। यह यात्रा हमें केवल स्वयं से नहीं, समस्त सृष्टि से जोड़ती है। जब चेतना ‘मैं’ के घेरे से बाहर निकलकर ‘हम’ का स्वर ग्रहण करती है, तभी करुणा, सहानुभूति और वैश्विक उत्तरदायित्व का जन्म होता है। विज्ञान और वेदांत दोनों आज इसी सत्य की ओर संकेत कर रहे हैं — भीतर की चेतना जागे बिना बाहरी संसार का संतुलन संभव नहीं।
डॉ मुकेश 'असीमित'
Jan 19, 2026
हिंदी लेख
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इक्कीसवीं सदी में भारत की वैश्विक पहचान उसकी युवा शक्ति गढ़ रही है—जो तकनीक, संस्कृति और नैतिकता को साथ लेकर चलती है। ब्रेन ड्रेन से ब्रेन सर्कुलेशन तक का यह सफ़र भारत को उपभोक्ता नहीं, समाधानकर्ता राष्ट्र बनाता है।
डॉ मुकेश 'असीमित'
Jan 19, 2026
Self Help and Improvements
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भारत की सबसे बड़ी ताकत उसका युवा मन है—साहसी, आकांक्षी और साफ़ दिल वाला। राष्ट्र-निर्माण केवल सड़क-पुल नहीं, मूल्यों और चरित्र का निर्माण है। जब युवा सेवा, उद्यमिता और नीति-भागीदारी से जुड़ते हैं, तो भविष्य आकार लेता है।
डॉ मुकेश 'असीमित'
Jan 19, 2026
Science Talk (विज्ञान जगत )
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यह लेख विकासवाद को केवल जीन या व्यक्ति की सीमा में नहीं बाँधता, बल्कि एपिजेनेटिक्स, सामाजिक प्रजातियों और मानव सांस्कृतिक विकास के माध्यम से यह दिखाता है कि परिवर्तन हमेशा सामूहिक परिस्थितियों में आकार लेता है। जीन बीज हैं, पर उनका भविष्य समाज, पर्यावरण और समय तय करता है।
डॉ मुकेश 'असीमित'
Jan 18, 2026
Cinema Review
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नेटफ्लिक्स की जाने जान सिर्फ एक मर्डर मिस्ट्री नहीं, बल्कि दिमाग, नैतिकता और जुनून के बीच खेला गया शतरंजी खेल है। यह फिल्म जवाब कम देती है, सवाल ज़्यादा—और शायद यही इसकी सबसे बड़ी ताकत भी है।