डॉ मुकेश 'असीमित'
Apr 10, 2026
English-Write Ups
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Today’s wars are no longer fought merely at borders—they are battles of supply chains, energy, technology, and narratives. In this complex global chessboard, India is emerging as a pivot state that is not only maintaining balance but is gradually reaching a position where it can influence the game itself.
डॉ मुकेश 'असीमित'
Apr 9, 2026
हिंदी कविता
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यह कविता असभ्यता के शोर और सभ्यता की मौन शक्ति के बीच के द्वंद्व को उजागर करती है, जहाँ अंततः समय स्वयं निर्णय देता है कि स्थायी क्या है—अट्टहास या संवेदना।
डॉ मुकेश 'असीमित'
Apr 9, 2026
Foreign Affair
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ईरान, ताइवान, रूस और वेनेज़ुएला के बीच चल रहे वैश्विक तनाव के बीच भारत एक निर्णायक भूमिका में उभर रहा है, जहाँ संतुलन, रणनीति और कूटनीति ही उसकी सबसे बड़ी ताकत है।
डॉ मुकेश 'असीमित'
Apr 9, 2026
News and Events
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लायंस क्लब सार्थक की बीओडी बैठक में वर्ष 2026–27 के लिए नई कार्यकारिणी की घोषणा की गई, जिसमें लायन उमेश शर्मा को अध्यक्ष, डॉ. चंद्रकांत सिंघल को सचिव और राजेश मंगल को कोषाध्यक्ष चुना गया।
डॉ मुकेश 'असीमित'
Apr 8, 2026
लघु कथा
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चीखें हवा में तैर रही थीं, पर सायरनों की आवाज़ ने उन्हें ढँक लिया—व्यवस्था का संगीत शुरू हो चुका था।
लाशें लाइन में सजा दी गईं—मृत्यु के बाद भी अनुशासन लागू था।
कैमरे तैयार थे, आँसू भी—बस ‘सीन’ सेट होना बाकी था।
और अंत में वही वाक्य—“हालात काबू में हैं।”
डॉ मुकेश 'असीमित'
Apr 5, 2026
व्यंग रचनाएं
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“मैं उस दौर का अनाम प्रेमाचार्य था, जिसने प्रेम के सर्वहारा वर्ग के लिए जनहित याचिका की तरह प्रेमपत्र लिखे—निःशुल्क, निस्वार्थ और निस्संग।”
“बिना शायरी के प्रेमपत्र ऐसा ही होता जैसे दाल बिना तड़के।”
“एक ही प्रेमिका के लिए लिखते-लिखते हम भी ऊब गए—पर प्रेमियों के दिलों में आग बराबर जलती रही।”
डॉ मुकेश 'असीमित'
Apr 4, 2026
Self Help and Improvements
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क्या मनुष्य वास्तव में स्वतंत्र है या प्रकृति और परिस्थितियों की कठपुतली? यह लेख फ्री विल की अवधारणा को गहराई से समझाते हुए बताता है कि असली स्वतंत्रता हमारे चुनाव में छिपी है।
डॉ मुकेश 'असीमित'
Apr 4, 2026
व्यंग रचनाएं
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बब्बन चाचा ने परदादा की संदूक में रखी मूँछें निकालकर इतिहास को चेहरे पर चिपका लिया। अब वे हर सुबह ‘इतिहास अलाप’ करते हैं और वर्तमान को ताले में बंद कर देते हैं—क्योंकि आजकल असली मेहनत से ज्यादा आसान है विरासत पहन लेना।
डॉ मुकेश 'असीमित'
Apr 3, 2026
Blogs
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लायंस क्लब सार्थक एवं डीएस साइंस अकादमी के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित रक्तदान शिविर में 31 यूनिट रक्त संग्रहित कर समाजसेवा का उत्कृष्ट उदाहरण प्रस्तुत किया गया।
डॉ मुकेश 'असीमित'
Apr 3, 2026
व्यंग रचनाएं
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देवर्षि नारद इंद्र को बताते हैं कि मृत्युलोक में मूर्खता अब योग्यता, नीति और प्रमोशन का आधार बन चुकी है। बुद्धिमान अल्पसंख्यक हो चुके हैं और प्रश्न करना अपराध माना जाने लगा है। इस व्यंग्यात्मक संवाद में मूर्खता के सामाजिक, राजनीतिक और प्रशासनिक स्वरूप का तीखा और हास्यपूर्ण चित्रण किया गया है।