डॉ मुकेश 'असीमित'
Jan 5, 2026
Darshan Shastra Philosophy
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नया साल समय के बदलने का नहीं, सोच के बदलने का उत्सव है।
प्रकृति जहाँ निरंतरता में जीती है, वहीं मनुष्य हर साल खुद से पूछता है—क्या मैं यही रहना चाहता हूँ?
यह लेख नए साल के उत्साह, मनुष्य की अनुकूलन क्षमता और पशु-प्रवृत्तियों से आगे बढ़ने की मानवीय बेचैनी पर एक विचारोत्तेजक दृष्टि डालता है।
डॉ मुकेश 'असीमित'
Jan 5, 2026
हास्य रचनाएं
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बचपन में लाइट जाना उत्सव था—कहानियाँ, तारे और परिवार।
आज लाइट जाए या ग्रिड फेल हो—ज़िंदगी स्क्रीन के सहारे चलती है।
यह कार्टून उसी बदलाव पर एक हल्का, चुभता और मुस्कराता व्यंग्य है।
डॉ मुकेश 'असीमित'
Jan 4, 2026
Cinema Review
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अचानक मिला पैसा क्या सच में वरदान होता है, या वह इंसान की नैतिक नींव को भी हिला देता है?
छप्पर फाड़ के एक ऐसी फ़िल्म है, जो हँसाते-हँसाते आपको अपने भीतर झाँकने पर मजबूर कर देती है—बिना उपदेश दिए, सिर्फ़ सवाल छोड़कर।
डॉ मुकेश 'असीमित'
Jan 4, 2026
Cinema Review
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यह फ़िल्म सिर्फ़ एक केस की कहानी नहीं कहती, बल्कि समाज, क़ानून, धर्म और स्त्री-अधिकार के बीच खड़े असहज सवालों को सामने रखती है। हक वह सिनेमा है जो परदे पर नहीं, दर्शक के भीतर बहस शुरू करता है।
डॉ मुकेश 'असीमित'
Jan 2, 2026
व्यंग रचनाएं
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आज के समय में नाम समाधान नहीं, विकल्प बन गया है।
जहाँ समस्याएँ हटाना कठिन हो, वहाँ नाम बदल देना सबसे आसान नीति है।
यह व्यंग्य उसी नाम-प्रधान विकास दर्शन पर एक तीखा मुस्कुराता कटाक्ष है।
डॉ मुकेश 'असीमित'
Jan 1, 2026
India Story \बात अपने देश की
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नया साल कोई तारीख नहीं, भीतर की एक हल्की-सी हलचल है।
उत्सव का सवाल नहीं, चेतना का सवाल है।
जो छूट गया, वही नया है; जो थाम लिया, वही बोझ।
कैलेंडर बदलते रहते हैं, साल तभी बदलता है जब दृष्टि बदलती है।
डॉ मुकेश 'असीमित'
Dec 31, 2025
हिंदी कविता
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वर्ष पच्चीस एक ही नहीं था—वह हर व्यक्ति के लिए अलग निकला।
कहीं हँसी थी, कहीं आँसू;
कहीं खजाना भरा, कहीं खाली हाथ।
यह कविता समय की उसी भीड़ को दर्ज करती है
जहाँ हर जीवन अपना-सा सच लेकर चलता है।
डॉ मुकेश 'असीमित'
Dec 30, 2025
Cinema Review
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“स्कारलेट भूख से लड़ती है, राधा भूख को सहकर मूल्य बचाती है।”
“एक स्त्री स्वयं को बचाने के लिए समाज से टकराती है, दूसरी समाज को बचाने के लिए स्वयं से।”
“स्कारलेट की जिद निजी है, राधा की दृढ़ता सामूहिक।”
“दोनों हारती नहीं हैं, पर जीत की उनकी परिभाषा अलग है।”
डॉ मुकेश 'असीमित'
Dec 30, 2025
Lifestyle
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हम बच्चे के हाथ में खिलौना नहीं, भविष्य थमा देते हैं।”
“शरारत दोष नहीं, जीवन की पहली प्रयोगशाला है।”
“थोपे गए संस्कार अनुशासन पैदा करते हैं, चेतना नहीं।”
“गलती न करने का अभिनय, गलती करने से ज़्यादा अनैतिक है।”
“जिस बचपन में शरारत मर जाती है, उस जीवन में साहस कभी जन्म नहीं लेता।”
डॉ मुकेश 'असीमित'
Dec 29, 2025
Cinema Review
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राजेश खन्ना पहले सुपरस्टार नहीं थे, वे उस दौर का नाम थे जब सिनेमा पूजा बन गया था।
तालियाँ जब बहुत देर तक बजती रहें, तो आदमी शोर का आदी हो जाता है और खामोशी उसे डराने लगती है।
जिसने एक बार शिखर को घर समझ लिया, वह ज़िंदगी भर मैदान को कमतर मानता रहा।
काका की मुस्कान जितनी चमकदार थी, उनके भीतर का अकेलापन उतना ही गहरा।