नाम में क्या रखा है?

डॉ मुकेश 'असीमित' Jan 2, 2026 व्यंग रचनाएं 0

आज के समय में नाम समाधान नहीं, विकल्प बन गया है। जहाँ समस्याएँ हटाना कठिन हो, वहाँ नाम बदल देना सबसे आसान नीति है। यह व्यंग्य उसी नाम-प्रधान विकास दर्शन पर एक तीखा मुस्कुराता कटाक्ष है।

नया साल : तारीख नहीं, दृष्टि का उत्सव

डॉ मुकेश 'असीमित' Jan 1, 2026 India Story \बात अपने देश की 0

नया साल कोई तारीख नहीं, भीतर की एक हल्की-सी हलचल है। उत्सव का सवाल नहीं, चेतना का सवाल है। जो छूट गया, वही नया है; जो थाम लिया, वही बोझ। कैलेंडर बदलते रहते हैं, साल तभी बदलता है जब दृष्टि बदलती है।

अलविदा पच्चीस!-kavita-dr mueksh

डॉ मुकेश 'असीमित' Dec 31, 2025 हिंदी कविता 0

वर्ष पच्चीस एक ही नहीं था—वह हर व्यक्ति के लिए अलग निकला। कहीं हँसी थी, कहीं आँसू; कहीं खजाना भरा, कहीं खाली हाथ। यह कविता समय की उसी भीड़ को दर्ज करती है जहाँ हर जीवन अपना-सा सच लेकर चलता है।

स्कारलेट और राधा : दो सभ्यताएँ, दो स्त्रियाँ, दो जीवन-दर्शन

डॉ मुकेश 'असीमित' Dec 30, 2025 Cinema Review 0

“स्कारलेट भूख से लड़ती है, राधा भूख को सहकर मूल्य बचाती है।” “एक स्त्री स्वयं को बचाने के लिए समाज से टकराती है, दूसरी समाज को बचाने के लिए स्वयं से।” “स्कारलेट की जिद निजी है, राधा की दृढ़ता सामूहिक।” “दोनों हारती नहीं हैं, पर जीत की उनकी परिभाषा अलग है।”

बचपन : अनुशासन की पहली क़ैद या स्वतंत्रता का पहला उत्सव?

डॉ मुकेश 'असीमित' Dec 30, 2025 Lifestyle 0

हम बच्चे के हाथ में खिलौना नहीं, भविष्य थमा देते हैं।” “शरारत दोष नहीं, जीवन की पहली प्रयोगशाला है।” “थोपे गए संस्कार अनुशासन पैदा करते हैं, चेतना नहीं।” “गलती न करने का अभिनय, गलती करने से ज़्यादा अनैतिक है।” “जिस बचपन में शरारत मर जाती है, उस जीवन में साहस कभी जन्म नहीं लेता।”

राजेश खन्ना : सुपरस्टार से अकेलेपन तक — एक सितारे की पूरी कथा

डॉ मुकेश 'असीमित' Dec 29, 2025 Cinema Review 0

राजेश खन्ना पहले सुपरस्टार नहीं थे, वे उस दौर का नाम थे जब सिनेमा पूजा बन गया था। तालियाँ जब बहुत देर तक बजती रहें, तो आदमी शोर का आदी हो जाता है और खामोशी उसे डराने लगती है। जिसने एक बार शिखर को घर समझ लिया, वह ज़िंदगी भर मैदान को कमतर मानता रहा। काका की मुस्कान जितनी चमकदार थी, उनके भीतर का अकेलापन उतना ही गहरा।

बीता साल: घटनाओं का नहीं, प्रतिक्रियाओं का इतिहास

डॉ मुकेश 'असीमित' Dec 27, 2025 India Story \बात अपने देश की 0

यह साल किसी कैलेंडर की तरह नहीं बीता, बल्कि अधूरी डायरी की तरह—जहाँ स्याही कम और धड़कन ज़्यादा थी। घटनाएँ बदलीं, लेकिन उनसे ज़्यादा बदले हमारे डर, ग़ुस्सा और चुप्पियाँ। यह साल हमें किसी नतीजे तक नहीं लाया, बल्कि सवालों की लंबी सूची सौंप गया—कि हम क्या सोचते हैं, कैसे सोचते हैं और कब चुप रहते हैं। आतंक, युद्ध, आस्था, कॉमेडी, सोशल मीडिया—हर मोर्चे पर यह साल हमें भीतर तक झकझोरता रहा। इतिहास बनता रहा, और हम बदलते रहे।

ग़ालिब जयंती: “फेल्ट थॉट” का सुपरस्टार—दिल भी, दिमाग़ भी

डॉ मुकेश 'असीमित' Dec 27, 2025 India Story \बात अपने देश की 0

27 दिसंबर को ग़ालिब सिर्फ़ याद नहीं आते—वे हमारे भीतर बोल उठते हैं। उनकी शायरी “फेल्ट थॉट” है: जज़्बात की नर्मी और तर्क की रोशनी का दुर्लभ मेल। ग़ालिब को पढ़ना मतलब अपनी उलझन, तन्हाई और हैरत के लिए सही लफ़्ज़ पा लेना—और फिर उन लफ़्ज़ों के साथ थोड़ा हल्का हो जाना। आज के डिजिटल दौर में भी ग़ालिब उतने ही ज़रूरी हैं—क्योंकि वे हमें नफ़रत से कम, समझ से ज़्यादा जोड़ते हैं।

मैं और मेरी हिंदी

डॉ मुकेश 'असीमित' Dec 26, 2025 हिंदी कविता 1

“मंच पर मैं फूलों में लिपटी हूँ, और व्यवहार में हाशिए पर सिमटी हूँ।” “‘राजभाषा’ कहलाती मैं, फिर क्यूँ हर वाक्य के बाद खिचड़ी सी हो जाती मैं।” “ये तालियाँ हैं या सिर्फ़ एक दिन का उत्सव—हिंदी दिवस।” “हमें हिंदी से मोहब्बत है—जीती-जागती, सुलगती, बोलती-लड़ती मोहब्बत!”