स्वेच्छा है भी… और नहीं भी

डॉ मुकेश 'असीमित' Apr 4, 2026 Self Help and Improvements 0

क्या मनुष्य वास्तव में स्वतंत्र है या प्रकृति और परिस्थितियों की कठपुतली? यह लेख फ्री विल की अवधारणा को गहराई से समझाते हुए बताता है कि असली स्वतंत्रता हमारे चुनाव में छिपी है।

इतिहास का संदूक और बब्बन चाचा की मूँछें

डॉ मुकेश 'असीमित' Apr 4, 2026 व्यंग रचनाएं 0

बब्बन चाचा ने परदादा की संदूक में रखी मूँछें निकालकर इतिहास को चेहरे पर चिपका लिया। अब वे हर सुबह ‘इतिहास अलाप’ करते हैं और वर्तमान को ताले में बंद कर देते हैं—क्योंकि आजकल असली मेहनत से ज्यादा आसान है विरासत पहन लेना।

लायंस क्लब सार्थक एवं डीएस साइंस अकादमी के संयुक्त तत्वावधान में रक्तदान शिविर सम्पन्न

डॉ मुकेश 'असीमित' Apr 3, 2026 Blogs 0

लायंस क्लब सार्थक एवं डीएस साइंस अकादमी के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित रक्तदान शिविर में 31 यूनिट रक्त संग्रहित कर समाजसेवा का उत्कृष्ट उदाहरण प्रस्तुत किया गया।

मूर्खोपाख्यानम् : देवलोक सभा में मूर्खता का महातांडव

डॉ मुकेश 'असीमित' Apr 3, 2026 व्यंग रचनाएं 0

देवर्षि नारद इंद्र को बताते हैं कि मृत्युलोक में मूर्खता अब योग्यता, नीति और प्रमोशन का आधार बन चुकी है। बुद्धिमान अल्पसंख्यक हो चुके हैं और प्रश्न करना अपराध माना जाने लगा है। इस व्यंग्यात्मक संवाद में मूर्खता के सामाजिक, राजनीतिक और प्रशासनिक स्वरूप का तीखा और हास्यपूर्ण चित्रण किया गया है।

हनुमान जयंती विशेष: बल, भक्ति और विश्वास का अद्भुत संगम

डॉ मुकेश 'असीमित' Apr 2, 2026 Important days 0

हनुमान जयंती पर प्रस्तुत यह लेख हनुमान जी के पराक्रम से आगे बढ़कर उनके भक्ति, विश्वास और आंतरिक शक्ति के स्वरूप को समझने का प्रयास है—जहाँ हर मनुष्य के भीतर छिपे सामर्थ्य को जगाने का संदेश मिलता है।

ऊर्जा का आवेशन

Ram Kumar Joshi Apr 2, 2026 व्यंग रचनाएं 1

“ऊर्जा स्वयं न पाजिटिव होती है न नेगेटिव—वह तो मात्र साधन है। फर्क सिर्फ इतना है कि उसे साधु साधे या ‘साहिब’ साधे।”

अप्रैल फूल बनाया — उनको ग़ुस्सा आया

डॉ मुकेश 'असीमित' Apr 1, 2026 Important days 0

अप्रैल फूल अब एक दिन का त्योहार नहीं रहा, बल्कि समाज का स्थायी चरित्र बन चुका है—जहाँ राजनीति, मीडिया और सोशल मीडिया मिलकर रोज़ाना जनता को नए-नए रूपों में मूर्ख बनाते हैं, और जनता इसे मनोरंजन समझकर स्वीकार भी कर लेती है।

बॉलीवुड द्वारा गढ़े गए मिथकों को तोड़कर देशभक्ति की भावना को मजबूत करती हैं “धुरंधर 2”

Dr Shailesh Shukla Apr 1, 2026 Cinema Review 0

“धुरंधर 2” हिंदी सिनेमा में देशभक्ति की बदलती परिभाषा को सामने लाती है, जहाँ राष्ट्रप्रेम केवल युद्ध या नारों तक सीमित नहीं, बल्कि नागरिक जिम्मेदारी, सामाजिक चेतना और नैतिक मूल्यों से जुड़ा एक व्यापक दृष्टिकोण बन जाता है।

स्वेच्छा है भी… और नहीं भी

डॉ मुकेश 'असीमित' Mar 31, 2026 Darshan Shastra Philosophy 0

फ्री विल पूर्ण स्वतंत्रता नहीं, बल्कि दिशा चुनने की क्षमता है—जहाँ मनुष्य प्रकृति के प्रवाह से ऊपर उठने का साहस करता है।स्वतंत्र इच्छा वहीं जन्म लेती है, जहाँ मनुष्य अपने भीतर उठे विचारों को केवल देखना नहीं, बल्कि सजगता से चुनना सीखता है।

मेरे पास डिग्री है…तेने खन्ने क्या ?

डॉ मुकेश 'असीमित' Mar 31, 2026 हिंदी लेख 0

आज के दौर में आदमी का मूल्य उसके चरित्र से नहीं, फाइल में लगी डिग्री से तय होता है। डिग्री ज्ञान का प्रमाण कम, सामाजिक प्रतिष्ठा का पासपोर्ट अधिक बन चुकी है—और बेरोज़गारी इस पासपोर्ट पर रोज़ वीज़ा रिजेक्ट कर रही है।