राष्ट्रीय सुरक्षा और एआई: साइबर युद्ध के नए दौर की चुनौती

Dr Shailesh Shukla Mar 20, 2026 शोध लेख 0

कृत्रिम मेधा (AI) ने युद्ध की परिभाषा बदल दी है। साइबर हमले अब केवल तकनीकी खतरे नहीं, बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा, अर्थव्यवस्था और सामाजिक स्थिरता के लिए गंभीर चुनौती बन चुके हैं। यह लेख साइबर युद्ध के बदलते स्वरूप, भारत की स्थिति और एआई की दोधारी भूमिका पर गहन विश्लेषण प्रस्तुत करता है।

पोथी नहीं, सूत्र: पंचांग का जीवित विज्ञान

डॉ मुकेश 'असीमित' Mar 20, 2026 India Story \बात अपने देश की 0

पंडित पोथी नहीं खोलता, वह सूत्र खोलता है—और गणना करता है। पंचांग कोई स्थिर किताब नहीं, हर साल दोहराई जाने वाली एक जीवित गणितीय प्रक्रिया है। ग्रहण भविष्यवाणी नहीं, सूर्य और चंद्र की गति का सटीक परिणाम है। पंचांग इसलिए जीवित है क्योंकि उसने बदलाव को परंपरा का विरोध नहीं, उसका विस्तार माना।

समय: सुविधा नहीं, समझ की यात्रा

डॉ मुकेश 'असीमित' Mar 20, 2026 India Story \बात अपने देश की 0

समस्या सुविधा में नहीं, उसे ही ज्ञान मान लेने में है। ग्रेगोरियन कैलेंडर समय बताता है, पंचांग समय को समझाता है। समय रेखा नहीं, एक चक्र है—लौटता हुआ, बदलता हुआ। जब हम समय को केवल मापते नहीं, महसूस भी करते हैं—तभी समझ पूरी होती है।

दुर्गा सप्तशती: भीतर के असुरों से युद्ध और देवी का जागरण

डॉ मुकेश 'असीमित' Mar 20, 2026 Book Review 0

हम दुर्गा सप्तशती को अक्सर केवल पूजा का ग्रंथ मानते हैं, लेकिन यह हमारे भीतर चल रहे संघर्षों की कथा है। मधु-कैटभ से लेकर रक्तबीज तक—हर असुर हमारे मन के किसी विकार का प्रतीक है, और देवी वह चेतना है जो हमें इनसे मुक्त करती है।

नव संवत्सर गीत

डॉ मुकेश 'असीमित' Mar 19, 2026 हिंदी कविता 0

“छंटे कुहासा, सूरज निकले, मन का हर अंधकार पिघले… नव विचारों के साथ यह संवत्सर केवल तिथि नहीं, बल्कि चेतना का एक नया उदय है।”

समय का धर्म: BC, AD और Year Zero की उलझी हुई कहानी

डॉ मुकेश 'असीमित' Mar 19, 2026 India Story \बात अपने देश की 0

हम जिस कैलेंडर को पूरी तरह वैज्ञानिक मानते हैं, उसके भीतर धर्म, इतिहास और सत्ता की परतें छिपी हैं। BC, AD और Year Zero की उलझन यह बताती है कि समय केवल गिनती नहीं, एक मानसिक फ्रेमवर्क भी है।

तारीख़ों का सच: ग्रेगोरियन कैलेंडर—विज्ञान, सत्ता और संयोग की कहानी

डॉ मुकेश 'असीमित' Mar 19, 2026 India Story \बात अपने देश की 0

हम रोज़ जिस कैलेंडर पर भरोसा करते हैं, वह केवल समय गिनने का साधन नहीं, बल्कि इतिहास, सत्ता और मानवीय समझौतों का जीवित दस्तावेज़ है। ग्रेगोरियन कैलेंडर उतना सीधा और वैज्ञानिक नहीं जितना हम मानते हैं—उसके भीतर कई परतें हैं, जिन्हें समझना ज़रूरी है।

पंचांग: परंपरा नहीं, चलता हुआ गणित

डॉ मुकेश 'असीमित' Mar 18, 2026 India Story \बात अपने देश की 0

पंचांग कोई पोथी नहीं, हर साल दोहराई जाने वाली एक जीवित गणना है। पंडित भविष्यवाणी नहीं करता, वह खगोलीय मॉडल के आधार पर गणना करता है। सूर्य सिद्धांत आस्था नहीं, सूत्रों और गणित की भाषा में लिखा एक खगोल ग्रंथ है। पंचांग इसलिए जीवित है क्योंकि उसमें बदलाव को परंपरा का विरोध नहीं, उसका हिस्सा माना गया।

तिथि का विज्ञान-पंचांग का रहस्य

डॉ मुकेश 'असीमित' Mar 18, 2026 India Story \बात अपने देश की 0

अष्टमी कोई आस्था नहीं, एक सटीक खगोलीय मापन है—12 डिग्री का अंतर। तिथि समय नहीं, कोण है—घंटों में नहीं, डिग्री में मापी जाती है। पंचांग घड़ी से नहीं, आकाश से समय पढ़ता है—यही उसका विज्ञान और सौंदर्य है। जब हम तिथि को “डेट” समझते हैं, तब भ्रम पैदा होता है; जब उसे खगोलीय भाषा समझते हैं, सब स्पष्ट हो जाता है।

शक संवत और विक्रम संवत : दो घड़ियाँ, एक सभ्यता की

डॉ मुकेश 'असीमित' Mar 18, 2026 India Story \बात अपने देश की 1

विक्रम संवत और शक संवत का अंतर केवल दो कैलेंडरों का अंतर नहीं, बल्कि परंपरा और प्रशासन की दो अलग जरूरतों को समझने का विषय है। हमारे त्योहार जहाँ तिथि, नक्षत्र और मुहूर्त से संचालित होते हैं, वहीं राष्ट्रीय जीवन को एक स्थिर और सरल नागरिक कैलेंडर की आवश्यकता होती है। भारत की समय-परंपरा इतनी समृद्ध है कि यहाँ एक ही देश में धर्म के लिए अलग समय-भाषा और शासन के लिए अलग समय-व्यवस्था साथ-साथ चलती है। शक संवत को अपनाना विक्रम संवत का विरोध नहीं था, बल्कि आधुनिक प्रशासनिक सुविधा और वैज्ञानिक एकरूपता की आवश्यकता का परिणाम था।