शादी में एक रोटी की तलाश
राजमहल जैसे वैभव के बीच, असली युद्ध तंदूर पर था—एक रोटी की तलाश में खड़े आधुनिक अर्जुन।
India Ki Baat
राजमहल जैसे वैभव के बीच, असली युद्ध तंदूर पर था—एक रोटी की तलाश में खड़े आधुनिक अर्जुन।
हवेली की दीवारों में चिपकी यादें और पॉश कॉलोनी के सपने के बीच फँसा एक “माँ का लाडला” — यह सिर्फ घर की बहस नहीं, दो पीढ़ियों की मानसिकता का टकराव है।
मनुष्य की असली पहचान उसके दावों से नहीं, बल्कि उसके मन में बसे विचारों, उसके चुने हुए लक्ष्यों और उसके समर्पण से बनती है। हम वही हैं, जिसे पाने के लिए हम समय और ऊर्जा अर्पित करते हैं।
गीता किसी एक दर्शन का ग्रंथ नहीं, बल्कि जीवन-दर्शन का समन्वय है। सांख्य से विश्लेषण, योग से अभ्यास, वेदान्त से दृष्टि, भक्ति से करुणा और कर्मयोग से आचरण — गीता आज भी मनुष्य को संतुलन, समत्व और जिम्मेदारी का मार्ग दिखाती है।
Galgotia University AI Summit विवाद ने केवल एक तकनीकी चूक नहीं, बल्कि हमारे समाज की उस मानसिकता को उजागर किया है जहाँ हम सच्चाई से अधिक दिखावे को महत्व देते हैं। क्या हम मूवी सेट पर जी रहे हैं—जहाँ चमक असली है, पर दीवारें खोखली? यह लेख हमारे सामूहिक आत्ममंथन का आग्रह है।
शिक्षा विनम्र बनाती है — या हमने शिक्षा को ही छोटा कर दिया है? कहा जाता है—जितना आप शिक्षित होते हैं, उतना ही विनम्र, संवेदनशील और समझदार बनते हैं। शिक्षा केवल डिग्री का नाम नहीं, वह दृष्टि का विस्तार है। वह भीतर का अहंकार गलाकर मनुष्य को मनुष्य बनाती है। लेकिन प्रश्न यह है कि […]
लोकतंत्र की डाल पर हम खड़े नहीं हैं, अपनी-अपनी पूँछ से लटके हुए हैं।
Religion does not ask you to look up — it asks you to look within. The moment you turn inward, illusion begins to dissolve.
जब राजनीति पूजा करने लगे और पूजा राजनीति करने लगे— तब शंभो भी सोच में पड़ जाते हैं।
अनुवाद शब्दों का यांत्रिक स्थानांतरण नहीं, बल्कि सभ्यताओं का संप्रेषण है। यह वह पुल है, जिस पर चलते हुए हम एक भाषा से दूसरी भाषा में नहीं, बल्कि एक संस्कृति से दूसरी संस्कृति में प्रवेश करते हैं। अनुवादक शब्दों के पीछे छिपे समय, समाज और संवेदना को पढ़ता है—और उन्हें नए पाठक के हृदय में पुनर्जन्म देता है।