अप्रैल फूल बनाया — उनको ग़ुस्सा आया

डॉ मुकेश 'असीमित' Apr 1, 2026 Important days 0

अप्रैल फूल अब एक दिन का त्योहार नहीं रहा, बल्कि समाज का स्थायी चरित्र बन चुका है—जहाँ राजनीति, मीडिया और सोशल मीडिया मिलकर रोज़ाना जनता को नए-नए रूपों में मूर्ख बनाते हैं, और जनता इसे मनोरंजन समझकर स्वीकार भी कर लेती है।

बॉलीवुड द्वारा गढ़े गए मिथकों को तोड़कर देशभक्ति की भावना को मजबूत करती हैं “धुरंधर 2”

Dr Shailesh Shukla Apr 1, 2026 Cinema Review 0

“धुरंधर 2” हिंदी सिनेमा में देशभक्ति की बदलती परिभाषा को सामने लाती है, जहाँ राष्ट्रप्रेम केवल युद्ध या नारों तक सीमित नहीं, बल्कि नागरिक जिम्मेदारी, सामाजिक चेतना और नैतिक मूल्यों से जुड़ा एक व्यापक दृष्टिकोण बन जाता है।

स्वेच्छा है भी… और नहीं भी

डॉ मुकेश 'असीमित' Mar 31, 2026 Darshan Shastra Philosophy 0

फ्री विल पूर्ण स्वतंत्रता नहीं, बल्कि दिशा चुनने की क्षमता है—जहाँ मनुष्य प्रकृति के प्रवाह से ऊपर उठने का साहस करता है।स्वतंत्र इच्छा वहीं जन्म लेती है, जहाँ मनुष्य अपने भीतर उठे विचारों को केवल देखना नहीं, बल्कि सजगता से चुनना सीखता है।

मेरे पास डिग्री है…तेने खन्ने क्या ?

डॉ मुकेश 'असीमित' Mar 31, 2026 हिंदी लेख 0

आज के दौर में आदमी का मूल्य उसके चरित्र से नहीं, फाइल में लगी डिग्री से तय होता है। डिग्री ज्ञान का प्रमाण कम, सामाजिक प्रतिष्ठा का पासपोर्ट अधिक बन चुकी है—और बेरोज़गारी इस पासपोर्ट पर रोज़ वीज़ा रिजेक्ट कर रही है।

झूठ का मेगा मॉल

डॉ मुकेश 'असीमित' Mar 31, 2026 व्यंग रचनाएं 0

जब झूठ ने मार्केटिंग का चोला पहन लिया, तो सच आउटडेटेड घोषित कर दिया गया। “झूठ महा-सेल” में हर वर्ग के ग्राहक उमड़े—नेता, एंकर, धर्मगुरु, कोचिंग संचालक—सब अपने-अपने झूठ के पैकेट खरीदते दिखे। इसी भीड़ में एक बूढ़ा आदमी सच खोजता रह गया…

कहानी: मनुष्य का सबसे बड़ा आविष्कार

डॉ मुकेश 'असीमित' Mar 30, 2026 India Story \बात अपने देश की 0

मनुष्य की सबसे बड़ी ताकत उसकी कल्पना नहीं, बल्कि उस कल्पना पर सामूहिक विश्वास है। धर्म, पैसा, राजनीति—सब कहानियों के धागों से बुनी हुई संरचनाएँ हैं।

मिलिए धुरंधर के अब्दुल भट्ठाबी से

Pradeep Audichya Mar 30, 2026 Cinema Review 0

धुरंधर फिल्म में अब्दुल भट्ठाबी का किरदार निभाकर संजय मेहता ने एक बार फिर साबित किया कि रंगमंच की गहराई सिनेमा में भी उतनी ही प्रभावशाली होती है। उनकी यात्रा, तैयारी और अनुभव इस लेख में विस्तार से प्रस्तुत हैं।

नेताजी कर्मदास की कैंची लीला

डॉ मुकेश 'असीमित' Mar 30, 2026 व्यंग रचनाएं 0

नेताजी कर्मदास की राजनीति जनसेवा से नहीं, फीता-कटिंग से संचालित होती है। कैंची उनकी पहचान है और उद्घाटन उनका धर्म। लेकिन जब बाबा धर्मदास ने उनकी जगह ले ली, तो नेताजी के राजनीतिक अस्तित्व पर ही कैंची चल गई।

पायोजी मैंने ,सिलेंडर पायो ,!

Prem Chand Dwitiya Mar 29, 2026 व्यंग रचनाएं 1

वैश्विक युद्ध की चिंगारी जब चूल्हे तक पहुँची, तो गैस सिलेंडर अचानक ‘राम रतन धन’ बन गया—और आम आदमी लाइन, लाचारी और व्यंग्य के बीच झूलता रह गया।

सड़कों से गायब हुए फुटपाथ : अतिक्रमण पर आँख बंद करके बैठा प्रशासन

Dr Shailesh Shukla Mar 29, 2026 India Story \बात अपने देश की 0

भारत के शहरों में फुटपाथों का गायब होना सिर्फ अव्यवस्था नहीं, बल्कि शहरी नियोजन की विफलता और सामाजिक असमानता का प्रतीक बन चुका है।