डॉ मुकेश 'असीमित'
Mar 22, 2026
Book Review
0
आनंदमठ केवल एक कथा नहीं, एक चेतना है—जहाँ भूख विद्रोह को जन्म देती है, भक्ति शक्ति में बदल जाती है और मातृभूमि एक भाव नहीं, एक पुकार बन जाती है। बंकिमचंद्र का यह उपन्यास हमें याद दिलाता है कि राष्ट्र केवल मानचित्र नहीं, त्याग और तपस्या से निर्मित एक जीवित अनुभव है।
Dr Shailesh Shukla
Mar 22, 2026
शोध लेख
1
क्या कारण है कि उत्तर प्रदेश का विकास मॉडल आज पूरे देश में चर्चा का विषय बन गया है? आर्थिक प्रगति, निवेश, अवसंरचना और प्रशासनिक सुधारों का यह समन्वित मॉडल विकास की नई परिभाषा प्रस्तुत करता है।
डॉ मुकेश 'असीमित'
Mar 21, 2026
Culture
0
गणगौर केवल एक लोकपर्व नहीं, बल्कि स्त्री-जीवन की भावनाओं, आशाओं और सौंदर्य का उत्सव है। गाँव की उन गलियों में, जहाँ गीतों के साथ रिश्ते भी गूंजते थे, यह पर्व सचमुच “जीया” जाता था—न कि केवल निभाया जाता था।
Shakoor Anvar
Mar 21, 2026
गजल
0
फागुन आते ही दिल के तार अपने आप झनझना उठते हैं—
यादें रंग बनकर लौटती हैं, मोहब्बत कश्तियों की तरह पार लगती है,
और कहीं भीतर एक हल्की-सी चिंता भी सिर उठाती है—
कि ये रंग, ये रिश्ते, और ये व्यवस्थाएँ… टिकें भी रहेंगी या नहीं?
Dr Shailesh Shukla
Mar 20, 2026
शोध लेख
0
कृत्रिम मेधा (AI) ने युद्ध की परिभाषा बदल दी है। साइबर हमले अब केवल तकनीकी खतरे नहीं, बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा, अर्थव्यवस्था और सामाजिक स्थिरता के लिए गंभीर चुनौती बन चुके हैं। यह लेख साइबर युद्ध के बदलते स्वरूप, भारत की स्थिति और एआई की दोधारी भूमिका पर गहन विश्लेषण प्रस्तुत करता है।
डॉ मुकेश 'असीमित'
Mar 20, 2026
India Story \बात अपने देश की
0
पंडित पोथी नहीं खोलता, वह सूत्र खोलता है—और गणना करता है।
पंचांग कोई स्थिर किताब नहीं, हर साल दोहराई जाने वाली एक जीवित गणितीय प्रक्रिया है।
ग्रहण भविष्यवाणी नहीं, सूर्य और चंद्र की गति का सटीक परिणाम है।
पंचांग इसलिए जीवित है क्योंकि उसने बदलाव को परंपरा का विरोध नहीं, उसका विस्तार माना।
डॉ मुकेश 'असीमित'
Mar 20, 2026
India Story \बात अपने देश की
0
समस्या सुविधा में नहीं, उसे ही ज्ञान मान लेने में है।
ग्रेगोरियन कैलेंडर समय बताता है, पंचांग समय को समझाता है।
समय रेखा नहीं, एक चक्र है—लौटता हुआ, बदलता हुआ।
जब हम समय को केवल मापते नहीं, महसूस भी करते हैं—तभी समझ पूरी होती है।
डॉ मुकेश 'असीमित'
Mar 20, 2026
Book Review
0
हम दुर्गा सप्तशती को अक्सर केवल पूजा का ग्रंथ मानते हैं, लेकिन यह हमारे भीतर चल रहे संघर्षों की कथा है। मधु-कैटभ से लेकर रक्तबीज तक—हर असुर हमारे मन के किसी विकार का प्रतीक है, और देवी वह चेतना है जो हमें इनसे मुक्त करती है।
डॉ मुकेश 'असीमित'
Mar 19, 2026
हिंदी कविता
0
“छंटे कुहासा, सूरज निकले,
मन का हर अंधकार पिघले…
नव विचारों के साथ यह संवत्सर केवल तिथि नहीं,
बल्कि चेतना का एक नया उदय है।”
डॉ मुकेश 'असीमित'
Mar 19, 2026
India Story \बात अपने देश की
0
हम जिस कैलेंडर को पूरी तरह वैज्ञानिक मानते हैं, उसके भीतर धर्म, इतिहास और सत्ता की परतें छिपी हैं। BC, AD और Year Zero की उलझन यह बताती है कि समय केवल गिनती नहीं, एक मानसिक फ्रेमवर्क भी है।